माई रे सुना दे सुंदर लोरियां
मै सो जाऊ तेरी गोदियाँ
सारा जग घूम के देखा,
नहीं तोरे ह्रदय विचित्र सरेखा
सुब्बुद्दी है खोई देखि जग रीती
अशुध सी सोइ पा अंचल कि छइया
माई रे सुना दे.........
एक से मानुष तन मै पावा
दूजी से बन गई काया
एक ललाट अमर तिलक लगावे
दूजी लहू किया बोली लगावे
माई रे सुना दे सुन्दर लोरिया
मै सो जाऊ तेरी गोदिया l
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